Summary

रायली ठिकाना का सच्चा इतिहास। राधा नाम की कुहारवास की लड़की से शुरुआत। जसवंत सिंह 1621 में आकर बसे। तंवर वंश की संपूर्ण वंशावली। ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित।

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रायली ठिकाना इतिहास: राधा से रायली गौरवशाली इतिहास वर्णन
रायली ठिकाना इतिहास: राधा से रायली गौरवशाली इतिहास वर्णन

 

रायली ठिकाना की शुरुआत राधा नाम की कुहारवास की लड़की से हुई जिसके पति का जल्दी देहांत हो गया। जसवंत सिंह 1621 में बुहाना से आकर बसे। 2000 बीघा जमीन राधा के भरण-पोषण के लिए दी गई। तंवर वंश का गौरवशाली इतिहास।

सूचना स्रोत: श्री कृष्णपाल सिंह तंवर, ठिकाना रायली

विषय सूची

  1. राधा की गाथा: रायली नाम की शुरुआत
  2. जसवंत सिंह का आगमन 1621 ई०
  3. तंवर वंश की पूर्ण वंशावली
  4. ऐतिहासिक महत्व और विरासत

राधा की गाथा: रायली नाम की शुरुआत - एक विधवा की दुखभरी कहानी

क्या आपको पता है कि रायली ठिकाना का नाम एक विधवा महिला राधा के नाम पर पड़ा है? रायली ठिकाना इतिहास की शुरुआत एक दुखद लेकिन प्रेरणादायक कहानी से होती है। राधा नाम की कुहारवास की लड़की ने अपने जीवन संघर्ष से इस स्थान को अमर बना दिया।

राधा का विवाह नानवास में हुआ था।

दुर्भाग्य से उसके पति का जल्दी स्वर्गवास हो गया।

युवा विधवा राधा के भरण-पोषण के लिए उस समय 2000 बीघा जमीन दी गई थी।

यह जमीन उसके जीविकोपार्जन का मुख्य साधन बनी।

राधा की आर्थिक स्थिति और सहायता की आवश्यकता

राधा के पास पैसों की कमी होने के कारण उसे 2000 बीघा जमीन की देखभाल और खेती में कठिनाई हो रही थी।

उस समय एक विधवा महिला के लिए इतनी बड़ी संपत्ति का प्रबंधन करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण था।

इसी कारण उसे किसी योग्य व्यक्ति की मदद की आवश्यकता थी।

करण सिंह और नारत गांव की स्थापना

जसवंत सिंह के दूसरे भाई करण सिंह ने नारत गांव बसाया था।

करण सिंह राधा को रायली नाम से जानते थे।

इसलिए यह जमीन बाद में रायली के नाम से जानी जाने लगी।

यह नाम आज भी इस स्थान की पहचान है।

जसवंत सिंह का आगमन 1621 ई०: नया अध्याय शुरू

रायली ठिकाना इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ 1621 ई० में आया जब जसवंत सिंह बुआहाना से आकर यहां बसे। जसवंत सिंह ने राधा की मदद की और इस स्थान को एक नया जीवन दिया।

जसवंत सिंह का व्यक्तित्व और योगदान

जसवंत सिंह एक दयालु और कुशल प्रशासक थे।

उन्होंने राधा की कठिनाई को समझा और उसकी जमीन के प्रबंधन में सहायता की।

उनके आगमन से इस क्षेत्र का विकास शुरू हुआ।

जसवंत सिंह का देहांत 1635 ई०

जसवंत सिंह जी का 1635 ई० में देहांत हुआ।

उन्होंने 14 वर्षों तक इस स्थान की सेवा की।

उनकी मृत्यु के बाद उनके पुत्रों ने उनकी विरासत को आगे बढ़ाया।

तंवर वंश की पूर्ण वंशावली: पीढ़ी दर पीढ़ी का इतिहास

रायली ठिकाना इतिहास में तंवर वंश की वंशावली एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। जसवंत सिंह से शुरू होकर यह वंश आज तक चला आ रहा है।

प्रथम पीढ़ी: जसवंत सिंह के पुत्र

जसवंत सिंह के दो पुत्र हुए:

मामा राम सिंह - ज्येष्ठ पुत्र

सुखराम सिंह - कनिष्ठ पुत्र

द्वितीय पीढ़ी: मामा राम सिंह के पुत्र

मामा राम सिंह के दो पुत्र हुए:

ढोल सिंह - प्रमुख पुत्र

पदम सिंह - द्वितीय पुत्र

तृतीय पीढ़ी: ढोल सिंह के पुत्र

ढोल सिंह के दो पुत्र हुए:

नहुआन सिंह - ज्येष्ठ पुत्र

नवल सिंह - कनिष्ठ पुत्र

चतुर्थ पीढ़ी: नहुआन सिंह का पुत्र

नहुआन सिंह के एक पुत्र हुआ:

पीरू सिंह - एकमात्र पुत्र

पंचम पीढ़ी: पीरू सिंह के पुत्र

पीरू सिंह के दो पुत्र हुए:

मंगल सिंह - प्रथम पुत्र

श्योनारायण सिंह - द्वितीय पुत्र

षष्ठ पीढ़ी: मंगल सिंह की संतान

मंगल सिंह के तीन पुत्र हुए:

अर्जन सिंह - प्रथम पुत्र

प्रहलाद सिंह - द्वितीय पुत्र

गणपत सिंह - तृतीय पुत्र

षष्ठ पीढ़ी: श्योनारायण सिंह की संतान

श्योनारायण सिंह के तीन पुत्र हुए:

नानू सिंह - प्रथम पुत्र

चातु सिंह - द्वितीय पुत्र

रोहतन सिंह जी - तृतीय पुत्र

संपूर्ण वंशावली तालिका

तंवर वंश की पूर्ण वंशावली:

 

तंवर वंश की पूर्ण वंशावली:

पीढ़ी मुख्य व्यक्ति पुत्र/संतान
प्रथम जसवंत सिंह मामाराम सिंह, सुखराम सिंह
द्वितीय मामा राम सिंह ढोल सिंह, पदम सिंह
तृतीय ढोल सिंह नहुआन सिंह, नवल सिंह
चतुर्थ नहुआन सिंह पीरू सिंह
पंचम पीरू सिंह मंगल सिंह, श्योनारायण सिंह
षष्ठ मंगल सिंह अर्जन सिंह, प्रहलाद सिंह, गणपत सिंह
षष्ठ श्योनारायण सिंह नानू सिंह, छत्तु सिंह, रोहतन सिंह

ऐतिहासिक महत्व और विरासत: आज तक चलती परंपरा

रायली ठिकाना इतिहास न केवल एक स्थान का इतिहास है बल्कि यह मानवीय संवेदना और सहायता की अमर कहानी है। यह दिखाता है कि कैसे एक व्यक्ति की दयालुता और सेवा भावना पूरे क्षेत्र का भाग्य बदल सकती है।

रायली नाम का महत्व

रायली नाम राधा के नाम पर पड़ा है।

यह इस बात का प्रमाण है कि उस समय महिलाओं का सम्मान किया जाता था।

एक विधवा महिला के नाम पर पूरा स्थान नामित होना उस युग की सामाजिक व्यवस्था की उदारता को दर्शाता है।

तंवर वंश की निरंतरता

तंवर वंश आज भी जारी है।

इस क्षेत्र में इनका प्रभाव देखा जा सकता है।

यह वंश अपनी परंपराओं और मूल्यों को संजोए हुए है।

भविष्य की पीढ़ियों के लिए संदेश

यदि आप भी इस वंशावली में अपने बारे में या अपनी वंशावली के बारे में जानकारी चाहते हैं तो लेखक को उचित जानकारी दे सकते हैं।

यह इतिहास निरंतर चलता रहे, यह सभी की जिम्मेदारी है।

निष्कर्ष: एक अमर विरासत

रायली ठिकाना इतिहास एक प्रेरणादायक कहानी है जो दिखाती है कि कैसे मानवीय सहयोग और दयालुता से एक छोटी शुरुआत एक महान विरासत बन सकती है।

राधा की कठिनाई से शुरू होकर जसवंत सिंह की सेवा भावना तक, यह इतिहास मानवीय मूल्यों का जीवंत उदाहरण है।

मुख्य सीख:

मानवीय सहायता की शक्ति

महिलाओं के सम्मान की परंपरा

वंश परंपरा का महत्व

स्थानीय इतिहास का संरक्षण

यह इतिहास भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है और दिखाता है कि अच्छे कार्य कैसे युगों तक याद रखे जाते हैं।

Notes:

हमारा प्रयास है आपके ठिकाने ग्राम रायली को विश्वस्तर पर पहचान मिले।

आज के समय हमारा उद्देश्य है इसे maximum लोग जानें और इसमें राजेन्द्र सिंह तंवर की प्रयासों की मदद करें।

सूचना स्रोत: श्री कृष्णपाल सिंह तंवर, ठिकाना रायली

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Comments

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Feb 13, 2026
Good job done and very appreciable Add installation of kuwa and Ram Mandir and generation till us or passed away
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Tanwar KeshavFeb 13, 2026
Good work

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